- उज्जैन में त्योहारों से पहले पुलिस का फ्लैग मार्च, टावर चौक से नीलगंगा तक निकला मार्च; होली, रंगपंचमी और रमजान के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी
- महाकाल में तड़के भस्म आरती, स्वस्ति वाचन के बाद खुले चांदी के पट: पंचामृत अभिषेक, रजत मुकुट-त्रिपुण्ड से दिव्य श्रृंगार; “जय श्री महाकाल” के जयघोष से गूंजा मंदिर
- उज्जैन में मंदिर क्षेत्र के पास युवक से मारपीट: युवती के साथ होटल जा रहा था, बजरंग दल ने रोका; मोबाइल में अश्लील फोटो-वीडियो होने का आरोप, पुलिस ने जब्त किया फोन
- महाकाल मंदिर में तड़के भस्म आरती, स्वस्ति वाचन के बाद खुले चांदी के पट: रजत मुकुट, त्रिपुण्ड और पुष्पमालाओं से सजे बाबा, “जय श्री महाकाल” से गूंजा परिसर
- एमपी बजट 2026-27: सिंहस्थ के लिए 13,851 करोड़ का प्रस्ताव, उज्जैन में 3,060 करोड़ के नए विकास कार्य; 4.38 लाख करोड़ के कुल बजट में सिंहस्थ और इंफ्रास्ट्रक्चर पर विशेष फोकस
इस्कॉन मंदिर
सन 2006 में सफेद संगमरमर से बना यह मंदिर काफी भव्य है। यहाँ मुरली मनोहर और उनकी प्रेमिका राधा की बेहद खूबसूरत प्रतिमा है। इसके अलावा कृष्ण-बलराम और कृष्ण-रुक्मिणी की मूर्तियाँ भी बरबस आपका ध्यान आकर्षित कर लेती हैं। इस मंदिर की रूपरेखा और इस्कॉन मंदिर के प्रवर्तक पूज्यपाद गुरुजी की मनोहारी मूर्ति भी यहाँ स्थापित की गई है। हर इस्कॉन मंदिर की तरह यहाँ तुलसी बगीचा है, जिससे तुलसी की माला बनाई जाती है। इसके साथ ही मंदिर की छत पर कमल के फूल के ऊपर रासलीला में लीन श्रीकृष्ण और राधारानी का अद्भुत चित्रांकन है।
मंदिर की अपनी विशाल धर्मशाला है। यहाँ का नियम है कि यहाँ के सदस्य दस हजार रुपए जमा करवाने के बाद दुनियाभर के किसी भी मंदिर में साल में एक बार दो दिन के लिए रुक सकते हैं। इस दौरान अनुयायियों को सात्विक भोजन परोसा जाता है। इन सभी मंदिरों की खासियत यह है कि इनकी बनावट से लेकर आंतरिक संरचना तक को एक समान रखने की कोशिश की जाती है। आप दुनिया के किसी भी इस्कॉन मंदिर में जाएँ आपको यहाँ बेहद अपनापन महसूस होगा। इन सभी खासियतों के कारण इस्कॉन के प्रति देश-दुनिया के लोगों में अगाध श्रद्धा है।